Mount Abu / Abu Road : Janmashtami, the birth of Lord Krishna is celebrated with great devotion in the August/September months, on the Ashtami of Krishna Paksh or the 8th day of the dark fortnight in the month of Bhadon in India. Temples and homes are beautifully decorated and lit. An attractive feature of the celebrations are cribs & other decorations depicting stories of Lord Krishna’s childhood.
This year the Janmashtami was celebrated at the campus of Shantivan, Abu Road at the Head Quarters of the Brahma Kumaris here. The beautiful ‘Jhanki’ depicting Shri Krishna’s life, Shri Krishna lifting the Govardhan mountain, swinging, sleeping on the snake, playing with Gopis, ruling the kingdom etc. were shown in a beautiful and colorful manner with lighting, decoration and music were inaugurated by Dadi Ratanmohini and Dadi Ishu, Joint Chief of Brahma Kumaris, BK Munni, General Manager of Brahma Kumaris.
A show was also inaugurated by BK Shashi, National Co-ordinator of Sports Wing of Brahma Kumaris, at Om Shanti Bhawan in Mount Abu. BK Shashi explained the Spiritual Significance of Janmashtami, that Shri Krishna was the first prince of the Golden Age, full of all virtues, completely pure and viceless and we need to make effort to become like Krishna, which is possible only by having a connection with the Supreme Father.
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रास करते श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकी ने मोहा सभी का मन
– शांतिवन में सजा श्रीकृष्ण का दरबार, गोप-गोपियों संग नटखट बाल गोपाल की सजाई सुंदर झांकी
– देशभर से आए भाई-बहनों ने लिया झांकी का लाभ
2 सितंबर, आबू रोड।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन परिसर में रविवार को जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में सुंदर झांकी सजाई गई। इसमें श्रीकृष्ण के बाल रूप से लेकर राजतिलक के दृश्य को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाया गया। मुंबई से आए प्रोफेशनल कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय और सुंदर प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। झांकी में श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सभी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। वहीं शेषनाग पर नृत्य करते श्रीकृष्ण को निहारने के लिए हर कोई उत्सुक था। श्रीकृष्ण के साथ उनकी पूरी बाल मंडली का रूप देखते ही बन रहा था। शाम को 7 बजे से शुरू हुई झांकी देखने के लिए रात 11 बजे तक दर्शकों का तांता लगा रहा। सभी दादियों और वरिष्ठ भाई-बहनों फीता काटकर झांकी का उद्घाटन किया।
इस दौरान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव भी मनाया गया। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने कहा कि आज के दिन सभी संकल्प लें कि हम अपना जीवन श्रीकृष्ण के समान बनाएंगे। श्रीकृष्ण का जीवन 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी था। उनका हर एक कर्म आदर्श और पथप्रदर्शक था। उनके हर कर्म में श्रेष्ठता थी। ऐसे हम सभी का भी लक्ष्य होना चाहिए। संयुक्त मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी ने कहा कि सतयुग के प्रथम राजकुमार जैसा स्वयं को बनाने, उनके गुण धारण करना ही जीवन का लक्ष्य हो। इस मौके पर राजयोगिनी ईशु दादी, कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय, जनरल मैनेजर बीके मुन्नी बहन, मीडिया निदेशक बीके करुणा, शांतिवन के प्रबंधक बीके भूपाल भाई, मुख्य अभियंता बीके भरत सहित देशभर से आए 8 हजार से अधिक भाई-बहनें उपस्थित रहे।
फोटो- झांकी के आकर्षक रूप।
फोटो- रिबन काटकर झांकी का शुभारंभ करते दादियां व वरिष्ठ भाई-बहनें।
स्वयं को गुणवान बनाने का हो लक्ष्य – शशि बहन
जन्माष्टमी को लेकर सजी चैतन्य झांकी
माउंट आबू, २ सितम्बर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय पाण्डव भवन परिसर स्थित ओम शान्ति भवन में रविवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में चैतन्य झांकी व कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी संगठन के खेल प्रभाग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीके शशि बहन ने कहा कि गुणवान व्यक्तित्व के धनी श्रीकृष्ण के जीवन चरित्रों के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए मन की मल्लीनता को समाप्त करना होगा। स्वयं को गुणवान बनाने का लक्ष्य होना चाहिए। श्रीकृष्ण संपूर्ण पवित्र आत्मा है जो सर्वगुण संपन्न, सोलह कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी, मर्यादा पुरुषोत्तम, सतयुग के प्रथम महाराजकुमार है। स्वयं परमपिता शिव परमात्मा की अनुकंपा से ही श्रीकृष्ण गुणवान बना है। मनुष्य को स्वयं में दिव्यगुणों को आत्मसात करने की शक्ति राजयोग के जरिए परमपिता शिव परमात्मा से ही मिलती है।
शिक्षा प्रभाग उपाध्यक्ष, वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका बीके शीलू बहन ने कहा कि त्यौहारों केवल मनाने तक ही सीमित नहीं होने चाहिए बल्कि उनकी सार्थकता को समझने का प्रयास कर स्वयं के जीवन को चरित्रवान बनाने की मानसिकता होनी चाहिए। सत्यम् शिवम् सुन्दरम् परमात्मा के वरदान प्राप्त कर जीवन को चरित्रवान बनाने से ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्यौहार की सार्थकता सिद्ध होगी।
राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित, ग्लोबल अस्पताल की मुख्य परिचारिका बीके रूपा उपाध्याय ने कहा कि त्यौहार सामाजिक सदभाव को कायम रखने, जीवन को मूल्यवान बनाने के प्रतीक हैं।
राजयोग प्रशिक्षिका बीके इंद्रा बहन ने कहा कि अवगुणी दृष्टि छोड़ गुणों की तरफ ध्यान देने से ही स्वयं के जीवन को शान्ति से परिपूर्ण किया जा सकता है। बीके चंद्रशेखर, बीके शशिकांत, बीके रविन्द्र विजय, बीके ज्ञानेश्वर, बीके सतीश आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
चैतन्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर ओम शान्ति भवन में सजाई गई चैतन्य झांकी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। मक्खन खाना, बांसुरी बजाना, गईयां चराना आदि नटखट बाल-गोपाल की विभिन्न लीलाओं के प्रदर्शन से महौल कृष्णमय हो गया।
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माउंट आबू। जन्माष्टमी को लेकर ओम शान्ति भवन में सजी चैतन्य झांकी।




















